". राजस्थान के लोक नाट्य ~ Rajasthan Preparation

राजस्थान के लोक नाट्य


राजस्थान के लोक नाट्य 

लोकनाट्य- कथा या कहानी को रंगमंच पर प्रदर्शित करना लोकनाट्य कहलाता है।

रामलीला 

  • रामायण का रंगमंच पर प्रदर्शन करना रामलीला कहलाता है।
  • प्रसिद्ध रामलीला - बिसाऊ (झुंझनूं)
  • रामलीला को प्रसिद्धि तुल्सीदास गोस्वामी ने दिलाई।
  • नुंगला - रामलीला कि आरती 
  • ढाई कडी के दोहो कि रामलीला अटरू बांरा की प्रसिद्ध है।
  • धनुष लीला - यह मांगरोल (बांरा) कि प्रसिद्ध है।
  • प्रसिद्ध कलाकार - हरगोविंद स्वामी व रामसुख दास

रासलीला

  • भगवान श्रीकृष्ण कि लीलाओ को रंगमंच पर प्रदर्शित करना रासलीला कहलाता है।
  • रासलीला फुलेरा (जयपुर) व नाथद्वारा कि प्रसिद्ध है।
  • हित हरिवंश ने रासलीला को प्रसिद्धि दिलाई।

बहरूपिया कला/स्वांग

  • यह कला भरतपुर व शेखावटी क्षेत्र कि प्रसिद्ध है।
  • इसे प्रसिद्धि भीलवाडा के जानकी लाल भांड ने दिलाई, इन्हें राजस्थान का मंकी मैन भी कहा जाता है।
  • वागड क्षेत्र में इस कला का प्रवर्तक लादुराम भांड को माना जाता है।

तमाशा 

  • राजस्थान मे सर्वप्रथम तमाशा मानसिंह प्रथम के दरबार मे 1594 मे मोहनकवि द्वारा रचित 'धमक मंजरी' कथा पर प्रस्तुत किया गया।
  • इस नाटक मे महिला व पुरुष दोनों भाग लेते है।
  • प्रसिद्ध - जयपुर
  • इसमे तबला व सारंगी लोक वाद्य का वादन किया जाता है।
  • प्रमुख तमाशे - हीर रांजा, जोगी जोगन, झुटन मिंया, गोपीचंद का तमाशा 
  • गौहरा जान तमाशे कि प्रसिद्ध महिला कलाकार है।
  • तमाशे के अन्य कलाकार - बंशीधर भट्ट, बृजपाल भट्ट, वासुदेव भट्ट

रम्मत

  • रम्मत के लिए प्रसिद्ध स्थल - आचार्यों का चौक (बीकानेर) व जैसलमर
  • रम्मत मे पाटा संस्कृति बीकानेर की देन है। 
  • यह पति पत्नी के आदर्श जीवन पर आधारित है।

प्रमुख रम्मते

  • अमरसिंह राठौड़ री रम्मत
  • स्वतंत्र बावनी, छेले तंबोलन व मुमल - तेज कवि 
  • फक्कड़ दाता री रम्मत - यह बीकानेर के मुस्लिम संप्रदाय से संबंधित है।

ख्याल

कुचामनी ख्याल

  • प्रसिद्ध - नागौर
  • प्रवर्तक/जनक - लच्छीराम
  • उगमराज इस कल का अंतर्राष्ट्रीय कलाकार है। 

हैला ख्याल

  • प्रवर्तक - हैला शायर 
  • यह (लालसौट) दौसा, करौली व सवाई माधोपुर की प्रसिद्ध है।

अलीबख्स कि ख्याल 

  • यह मुंडावर (अलवर)की प्रसिद्ध है।
  • प्रवर्तक -अली बख्श (अलिबख्श को अलवर का रसखान कहा जाता है।)

चिडावा ख्याल

  • प्रवर्तक- नानूराम जी के शिष्य दुलिया राणा
  • प्रसिद्ध - झुञ्झुनु

तुर्रा-कलंगी ख्याल

  • प्रसिद्ध - चित्तौड़गढ़
  • इसमे तुर्रा पात्र भगवान शिव एवं कलंगी पात्र माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है।
  • इसमे कलंगीपात्र की भूमिका मुस्लिम कलाकार द्वारा निभाई जाती है इसलिए यह ख्याल हिन्दू-मुस्लिम एकता का परिचायक है।

शेखावटी ख्याल 

  • प्रवर्तक - नानुराम 

ढफ्फाली ख्याल 

  • प्रसिद्ध - अलवर 

किशनगढ़ी ख्याल 

  • प्रसिद्ध - अजमेर व जयपुर 
  • प्रवर्तक - बंशीधर शर्मा 

बीकनेरी ख्याल 

  • प्रवर्तक - मोती लाल

चार बैत

  • प्रवर्तक- खलीफा खाँ निहंग
  • प्रसिद्ध - टोंक
  • यह डफली वाद्य यंत्र के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

दंगल 

  • यह भरतपुर व सवाई माधोपुर जिले का प्रसिद्ध है।
  • कन्हैया दंगल - करौली का प्रसिद्ध है।
  • रसिया दंगल- भरतपुर
  • भेट दंगल - करौली

नौटंकी

  • प्रसिद्ध- भरतपुर 
  • यह कल मूलतः उत्तर प्रदेश की है।
  • प्रवर्तक- भूरीलाल

गवरी या राई 

  • प्रसिद्ध- उदयपुर व आस पास का क्षेत्र 
  • प्रवर्तक - कुटकूडिया भील
  • यह भगवान शिव व भस्मासुर की कथा पर आधारित है।
  • गवरी के विभिन्न प्रसंगो को जोड़ने के लिए जो नृत्य किया जाता है उसे गवरी की घाई कहा जाता है। 
  • मुख्य पात्र - झामट्या व खड़क्या

गंधर्व नाट्य

  • प्रसिद्ध- मारवाड़ 
  • यह जैन सम्प्रदाय से संबंधित लोकनाट्य है।

सनकादि लीला

  • प्रसिद्ध - बस्सी व घोसुंडी (चित्तौड़गढ़)

गौर लीला

  • इसका प्रदर्शन गरासिया जनजाति द्वारा गणगौर के अवसर पर किया जाता है। 

भवाई लोकनाट्य 

  • प्रसिद्ध - उदयपुर 
  • प्रवर्तक - बाधों जी जाट 
  • इसका प्रसंग सगा सगी है। 

कठपुतली 

  • प्रसिद्ध - भरतपुर 
  • यह नट जाति के लोगो द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। 

भारतीय लोक कला मण्डल 

  • स्थापना - उदयपुर, 1952 
  • इसकी स्थापना देवीलाल सांभर ने की। 
  • इसके द्वारा कठपुतली नाट्य को प्रशिक्षण दिया जाता है।

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